हिन्द से हिन्दी

हिन्द से हिन्दी लब खोलूँ तो आवाज बन जाऊँ हर अक्षर की मुस्कान बन जाऊँ अपनी ही माटी से शब्द बनाकर हिन्द देश की पहचान बन जाऊँ, मेरी भाषा हिन्दी बचपन हिन्दी है प्यार मेरा हिन्दी जवानी हिन्दी है जन्म हिन्दी से मृत्यु भी हिन्दी से हमारी संस्कृति की रीति हिन्दी है, आधार भाषा की विटप चेतन से ध्वनि की भाषा में व्योम-कण से भिन्न शब्दों की वाक्य भिन्न-भिन्न एकता की पहचान होती हिन्द से। रचयिता चैतन्य कुमार, सहायक शिक्षक, मध्य विद्यालय तीरा, ग्राम+पत्रालय:- तीरा खारदह, प्रखण्ड:- सिकटी, भाया:- कुर्साकाँटा, जिला:- अररिया, राज्य:- बिहार।