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हिन्द से हिन्दी

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हिन्द से हिन्दी लब खोलूँ तो आवाज बन जाऊँ हर अक्षर की मुस्कान बन जाऊँ अपनी ही माटी से शब्द बनाकर हिन्द देश की पहचान बन जाऊँ, मेरी भाषा हिन्दी बचपन हिन्दी है प्यार मेरा हिन्दी जवानी हिन्दी है जन्म हिन्दी से मृत्यु भी हिन्दी से हमारी संस्कृति की रीति हिन्दी है, आधार भाषा की विटप चेतन से ध्वनि की भाषा में व्योम-कण से भिन्न शब्दों की वाक्य भिन्न-भिन्न एकता की पहचान होती हिन्द से।                                 रचयिता चैतन्य कुमार, सहायक शिक्षक, मध्य विद्यालय तीरा, ग्राम+पत्रालय:- तीरा खारदह, प्रखण्ड:- सिकटी, भाया:- कुर्साकाँटा, जिला:- अररिया, राज्य:- बिहार।

बेटी हूँ मैं

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बेटी हूँ मैं बीज हूँ मैं तो दफ़न कर दो मुझे मिट्टी में तुम। उग आऊँगी, हरे खेत बन कहीं, लहलहाऊँगी। खिल उठूँगी, किसी फुलवारी में फूल बनकर। चहचहाऊँगी, किसी बाग़ में कहीं पंछी बन के। गुनगुनाऊँगी, किसी मुहाने पर, झरना बन। खिलखिलाऊँगी किसी आँगन में बन, नन्हीं कली। महक जाऊँ इन फ़िज़ाओं में खुशबू बन। मिल जाएँ गर, होंसलों के पंख मुझे, मैं उड़ूँगी। आसमाँ से दूर कहीं अनन्त में सितारा बन। चमक उठूँगी, सुनहरी धूप बन के सूरज बन। बेटी हूँ मैं जन्म लेने तो दो मुझे एक बार। वादा है मेरा, खुशियों से भर दूँगी तुम्हारा घर संसार। रचयिता अंजना कण्डवाल 'नैना' रा0 पू0 मा0 वि0 चामसैण, विकास क्षेत्र-नैनीडांडा, जनपद-पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।

महिला सशक्तीकरण , रंजना अवस्थी फतेहपुर

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महिला सशक्तीकरण , रंजना अवस्थी फतेहपुर *👩‍👩‍👧‍👧महिला सशक्तीकरण विशेषांक-178* *मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी* (दिनाँक- 22 दिसम्बर 2019)  *नाम:-रंजना अवस्थी* *पद :-सहायक अध्यापिका* विद्यालय:- पू०मा०वि० बेंती सादात विकास खण्ड-भिटौरा, जनपद- फ़तेहपुर *सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-* 👉 मैं रंजना अवस्थी सहायक अध्यापिका पू०मा०वि० बेंती सादात विकास खण्ड-भिटौरा, जनपद- फ़तेहपुर से।  मेरी नियुक्ति 23 मार्च-1999 को प्राथमिक विद्यालय चक काजीपुर, विकास खण्ड- असोथर, जिला-फतेहपुर के अति पिछड़े इलाके में हुई। जो मेरी इच्छा के विरुद्ध थी, पर मम्मी पापा के कहने पर जब तक कहीं औऱ नियुक्ति नहीं होती तब तक कर लो फिर छोङ देना।  मैं टीचर नहीं बनना चाहती थी, पर मैने वहाँ देखा कि बच्चे पढ़ना   चाहते थे वो सीखना चाहते थे, ये मेरे लिए बहुत ही अच्छी बात थी। मैं उनके  साथ मित्रवत हो गई बातचीत औऱ खेल को ही मैंने अपना जरिया बनाया। उनके निश्छल स्वभाव व प्यार ने मुझको ऐसा बाँधा कि मैं भूल गई कि मुझे टीचर न...

गणित का जादूगर

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गणित का जादूगर आओ जानें गणित के जादूगर को, 22 दिसम्बर इरोड तमिलनाडु में जन्मे श्री निवास रामानुजन को। प्रश्नों को पूछना, उत्तर जानना जिज्ञासा की गुत्थी सुलझाना। संसार का पहला पुरुष कौन? पृथ्वी बादल की दूरी पर गुरु भी मौन! भागफल क्या होगा! शून्य का शून्य से भाग देकर? स्कूल समय में काॅलेज की मैथ्स पढ़ डाली। पूत के पाँव पालने में झलक कर डाली। गणित में मिला ना कोई विशेष प्रशिक्षण!! दे संख्या सिद्धांत किया विश्लेषण। कक्षा 11वीं से पाँच वर्ष संघर्ष भरे, स्वयं पर विश्वास से प्रयत्नशील रहे। प्रथम शोध रहा बरनौली संख्याओं के गुण, जर्नल ऑफ इंडियन मैथेमेटिकल सोसायटी में प्रकाशन। प्रोफेसर हार्डी, श्री निवास के बने जौहरी, रामानुजन   हीरे  के  थे    पारखी। हार्डी से मिला 100/100 का पैमाना, नतमस्तक हुआ श्री निवास की प्रतिभा का जमाना। गणित चिर जीवनकाल में रहा विलक्षण, 3,884  प्रमेयों का किया संकलन। मात्र 33 वर्ष की आयु में भारत ने खोया लाल, जिसकी विद्वता से संपूर्ण विश्व निहाल। 22 दिसम्बर दिन गणित दिवस से देते हैं सम्मान, नमन आपको विश्व के...

कृषक की व्यथा

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कृषक की व्यथा कहलाता वो अन्नदाता  है, मिट्टी से सोना उगाता है। मेहनत से वो ना डरे कभी, वसुंधरा ही उसकी माता है॥ वो तृप्त करे  दूसरों को, पर खुद भूखा सो जाता है। मेहनत से वो ना डरे कभी, वसुंधरा ही उसकी माता है॥ हाड़ कपाऊँ ठंड हो या हो प्रचंड गर्मी प्रतिकूल मौसम भी उसे डरा ना पाता है॥ मेहनत से वो ना डरे कभी, वसुंधरा ही उसकी माता है॥ श्रम से हरगिज हार ना माने, पर अभावों से क्यूँ टूट जाता है? मेहनत से वो ना डरे कभी, वसुंधरा ही उसकी माता है॥ कृषि प्रधान कहाता अपना देश, फिर क्यूँ कृषक फांसी चढ़ जाता है॥ मेहनत से वो ना डरे कभी, वसुंधरा ही उसकी माता है॥ वो ना हो तो सोचो क्या होगा? ? जो खुद की बलि दे हमें खिलाता है॥ मेहनत से वो ना डरे कभी, वसुंधरा ही उसकी माता है॥ रचयिता  गीता यादव, प्रधानाध्यपिका, प्राथमिक विद्यालय मुरारपुर, विकास खण्ड-देवमई, जनपद-फ़तेहपुर।

हे! अन्नदाता तुमको नमस्कार

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हे! अन्नदाता तुमको नमस्कार सोने चाँदी से नहीं किन्तु तुमने मिट्टी से किया प्यार। खून पसीना बहा बहाकर, हरित क्रांति की लाते बहार। हे अन्नदाता-----------------। आज के दिन ही जन्मा था भारत में इक मानव महान। सातवें प्रधानमंत्री देश के चौ0 चरण सिंह था जिनका नाम। हे! अन्नदाता-------------------। कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ था उनका निज का पूरा परिवार। इसीलिए वे कृषक वर्ग से, करते थे वे जी भर प्यार।। हे! अन्नदाता---------+-------।। अपने शासनकाल में उन्होंने कृषक वर्ग पर दिया था ध्यान। हरित क्रांति लाने की खातिर, उन्हें समर्पित यह दिन आज।। हे! अन्नदाता-------------------। चिलचिलाती धूप हो क्वार माह की या हो ओलों की बौछार। सर्दी सहते पौष मास की, शस्य श्यामला करते तैयार।। हे! अन्नदाता----------------।। श्वेत क्रांति और हरित क्रांति के तुम सब हो मूल आधार। रोशन करके नाम देश का, हरित क्रांति की लाते बहार।। हे! अन्नदाता---------------।। २३दिसम्बर का पुनीत पर्व यह खुशियों से हम मनाते   आज। किसान दिवस के रूप में इनको नमन  कर रहे हम  सब आज।। ...

अटल रहे जीवन में

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अटल रहे जीवन में जन्म बटेश्वर धाम तुम्हारा ग्वालियर में तुम पले बढ़े। योग्य पिता के योग्य पुत्र तुम, राष्टभक्ति से गये गढ़े।। जन-जन के तुम रहे दुलारे, भारत रत्न हमारे हो। शुचिता का मार्ग दिखाने वाले मातृभूमि के प्यारे हो।। दृढ़ संकल्प हृदय में लेकर। परमाणु परीक्षण कर डाला।। शक्ति समाई कड़-कड़ में। ओज शौर्य से भर डाला।। कारगिल पर विजय प्राप्त की दुनिया ने लोहा माना। पाकिस्तान भी थर-थर काँपा, ब्रह्मतेज को पहचाना।। पत्रकार तुम रहे अलौकिक, सम्पादन का कार्य किया। स्वदेश, राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य, अर्जुन नवल प्रकाश दिया।। श्रेष्ठ योजना राष्ट्रहितों की, कितनी नयी निकाली। स्वर्ण- चतुर्भुज सड़क बनाई, दी कोंकण रेल निराली।। सुंगध तुम्हारी अब तक फैली, अंत्योदय को लाने वाले। अटल विहारी अटल रहोगे, भारत में कमल खिलाने वाले।     रचयिता रामकिशोर प्रजापति, सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय विरहटा,  विकास खण्ड-चिरगाँव,  जनपद -झाँसी (उ.प्र.)     7007382653