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अटल

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अटल काल के कपाल पर, जो लिखता, मिटाता था। मौत से लड़ने का, हुनर उसे आता था। बातें उसकी अंदाज निराला, सबके मन को भाता था भारत रत्न, सिरमौर वह, अटल नाम कहलाता था। पंचतत्त्व से बना शरीर ये, पंचतत्त्व मे मिल जाएगा। अटल सत्य है, अटल बात, अटल नाम रह जाएगा। दृढ़ - विचार और दृढ़ - शक्ति का, पाठ पढ़ा जब जाएगा। मन - मस्तिष्क के अंतरिक्ष में, बस याद अटल ही आएगा। राजनीति को काव्य - धारा में, वह बहा ले जाता था। अंतर्मन से, चितवन - चित, सबको चित कर जाता था। शून्य से उठाकर राजनीति को, जो शिखर तक लाता था। भारत - रत्न, सिरमौर वह, अटल नाम कहलाता था। अटल नाम कहलाता था... रचयिता डॉ0 ललित कुमार, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय खिजरपुर जोशीया,  विकास खण्ड-लोधा,  जनपद-अलीगढ़।

सूर्यग्रहण

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सूर्यग्रहण मम्मी ने पापा से बोला, कल पड़ेगा सूर्य - ग्रहण। मन मेरा तो कौंध गया था, अभी पड़ा था चन्द्र ग्रहण। पूछा जब मैंने मम्मी से, क्या होता है सूर्यग्रहण। डपट दिया मम्मी ने, ये कहकर, जाओ पापा की शरण। क्या होता है सूर्यग्रहण, जब पूछा मैंने पापा से। पापा ने भी टाल दिया, और बोले पूछो टीचर से। टीचर जी से पूछा, जब मैंने हौले, वह मन ही मन मुस्काकर बोले। बच्चों तुमको नहीं हैं फँसना, ये तो है विज्ञान की घटना। पृथ्वी घूमी, चंदा घूमा, पर न घूमा सूरज। इसी बात का झगड़ा बच्चों, मन में रखो तुम धीरज। घूम, घूमकर आते जब ये, तीनों एक दिशा पर। तब छाया पड़ती चंदा की, अपनी प्यारी वसुधा पर। पृथ्वी के जिस भाग में बच्चों, चंदा की छाया आयी. पृथ्वी के उस भाग से सूरज, देता नहीं दिखायी। प्यारे बच्चों बात पते की अब तुम इसे समझ लो। सूर्यग्रहण पड़ता कैसे है, मन-मस्तिष्क में भर लो। मन - मस्तिष्क में भर लो। रचयिता डॉ0 ललित कुमार, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय खिजरपुर जोशीया,  विकास खण्ड-लोधा,  जनपद-अलीगढ़।

जीवन हो उत्कर्ष

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जीवन हो उत्कर्ष बीत गया वर्ष उन्नीस, और य‍ह निकला निष्कर्ष मधुर वचन से होत सब, और बिगारै बोल कर्कश। हो जाए समरसता सब में, करें विचार विमर्श। क्षम्य हों त्रुटियाँ सभी, जो हो गयी बीते वर्ष। नव संचार हो जाये तन में, और जीवन हो उत्कर्ष। दूर हो अमंगल सबके, और मंगलमय हो 2020 नूतन वर्ष। रचयिता डॉ0 ललित कुमार, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय खिजरपुर जोशीया,  विकास खण्ड-लोधा,  जनपद-अलीगढ़।