अटल
अटल काल के कपाल पर, जो लिखता, मिटाता था। मौत से लड़ने का, हुनर उसे आता था। बातें उसकी अंदाज निराला, सबके मन को भाता था भारत रत्न, सिरमौर वह, अटल नाम कहलाता था। पंचतत्त्व से बना शरीर ये, पंचतत्त्व मे मिल जाएगा। अटल सत्य है, अटल बात, अटल नाम रह जाएगा। दृढ़ - विचार और दृढ़ - शक्ति का, पाठ पढ़ा जब जाएगा। मन - मस्तिष्क के अंतरिक्ष में, बस याद अटल ही आएगा। राजनीति को काव्य - धारा में, वह बहा ले जाता था। अंतर्मन से, चितवन - चित, सबको चित कर जाता था। शून्य से उठाकर राजनीति को, जो शिखर तक लाता था। भारत - रत्न, सिरमौर वह, अटल नाम कहलाता था। अटल नाम कहलाता था... रचयिता डॉ0 ललित कुमार, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय खिजरपुर जोशीया, विकास खण्ड-लोधा, जनपद-अलीगढ़।