अटल रहे जीवन में
अटल रहे जीवन में जन्म बटेश्वर धाम तुम्हारा ग्वालियर में तुम पले बढ़े। योग्य पिता के योग्य पुत्र तुम, राष्टभक्ति से गये गढ़े।। जन-जन के तुम रहे दुलारे, भारत रत्न हमारे हो। शुचिता का मार्ग दिखाने वाले मातृभूमि के प्यारे हो।। दृढ़ संकल्प हृदय में लेकर। परमाणु परीक्षण कर डाला।। शक्ति समाई कड़-कड़ में। ओज शौर्य से भर डाला।। कारगिल पर विजय प्राप्त की दुनिया ने लोहा माना। पाकिस्तान भी थर-थर काँपा, ब्रह्मतेज को पहचाना।। पत्रकार तुम रहे अलौकिक, सम्पादन का कार्य किया। स्वदेश, राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य, अर्जुन नवल प्रकाश दिया।। श्रेष्ठ योजना राष्ट्रहितों की, कितनी नयी निकाली। स्वर्ण- चतुर्भुज सड़क बनाई, दी कोंकण रेल निराली।। सुंगध तुम्हारी अब तक फैली, अंत्योदय को लाने वाले। अटल विहारी अटल रहोगे, भारत में कमल खिलाने वाले। रचयिता रामकिशोर प्रजापति, सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय विरहटा, विकास खण्ड-चिरगाँव, जनपद -झाँसी (उ.प्र.) 7007382653